रायपुर: राज्य के कानून-व्यवस्था नेतृत्व में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए, छत्तीसगढ़ सरकार ने वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी अरुण देव गौतम को आधिकारिक तौर पर राज्य का पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त कर दिया है। गृह विभाग की प्रधान सचिव निहारिका बारिक सिंह द्वारा शनिवार को जारी आधिकारिक आदेश के बाद, पिछले 17 महीनों से चल रही कार्यवाहक व्यवस्था समाप्त हो गई है।

राज्य सरकार ने इस नियुक्ति को 5 फरवरी, 2025 से (जिस दिन उन्होंने नवा रायपुर स्थित पुलिस मुख्यालय में कार्यवाहक पुलिस प्रमुख का पदभार संभाला था) ‘बैकडेट’ यानी भूतलक्षी प्रभाव से नियमित किया है।

⚖️ संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिफारिश पर लगी मुहर

यह नियुक्ति नई दिल्ली में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा गठित एक विशेष चयन पैनल की सिफारिशों के बाद की गई है। इस नियमितीकरण के तहत, राज्य सरकार ने अरुण देव गौतम को पे-मैट्रिक्स के लेवल 17 के अनुरूप ₹2,25,000 का निश्चित वेतन (एपेक्स स्केल) स्वीकृत किया है, जिससे अब वे छत्तीसगढ़ पुलिस बल के आधिकारिक प्रमुख (Head of Police Force – HoPF) बन गए हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार में कार्यवाहक डीजीपी का प्रभार संभालने से पहले, गौतम राज्य के गृह सचिव के रूप में सेवाएं दे रहे थे। इसके साथ ही उनके पास जेल, परिवहन, होमगार्ड और अग्निशमन सेवाओं जैसे कई महत्वपूर्ण विभागों का अतिरिक्त प्रभार भी था।

📋 प्रोफाइल: ग्रामीण परिवेश से देश के शीर्ष पुलिस पद तक का सफर

अरुण देव गौतम 1992 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी हैं। अपनी कड़क प्रशासनिक शैली और बेदाग छवि के लिए पहचाने जाने वाले गौतम का करियर बेहद शानदार रहा है:

  • शैक्षणिक पृष्ठभूमि: मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले अरुण देव गौतम ने अपनी शुरुआती शिक्षा ग्रामीण सरकारी स्कूलों से पूरी की। इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक किया और फिर प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), नई दिल्ली से राजनीति विज्ञान में एमए (MA) और अंतर्राष्ट्रीय कानून (International Law) में एमफिल (MPhil) की डिग्री हासिल की।

  • कैडर आवंटन: वे शुरुआत में अविभाजित मध्य प्रदेश कैडर के अधिकारी थे। नवंबर 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद, उन्होंने नए राज्य का विकल्प चुना।

  • मैदानी पुलिसिंग का लंबा अनुभव: गौतम ने छत्तीसगढ़ के छह सबसे चुनौतीपूर्ण जिलों—बिलासपुर, राजनांदगांव, रायगढ़, जशपुर, सरगुजा और कोरिया में पुलिस अधीक्षक (SP) के रूप में काम कर अपनी एक अलग पहचान बनाई।

  • चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां: उन्होंने राज्य में कई बड़े सुरक्षा अभियानों का नेतृत्व किया है। साल 2013 में हुए झीरम घाटी नक्सली हमले के बाद बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने और रणनीतिक तैनाती में उनकी अहम भूमिका थी। वे अपराध अनुसंधान विभाग (CID) और मुख्यमंत्री सुरक्षा विंग में भी प्रमुख पदों पर रह चुके हैं।

🎖️ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मान से नवाजे गए

34 वर्षों की अपनी लंबी और उत्कृष्ट सेवा के दौरान, अरुण देव गौतम को कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है:

  • विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति का पुलिस पदक (President’s Police Medal)

  • सराहनीय सेवा के लिए भारतीय पुलिस पदक (Indian Police Medal)

  • संयुक्त राष्ट्र (UN) पदक: युद्धग्रस्त कोसोवो में अंतर्राष्ट्रीय शांति सेना (UN Peacekeeping Operations) के तहत उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए।

छत्तीसगढ़ पुलिस में इस स्थायी नेतृत्व परिवर्तन के बाद, रायपुर के प्रशासनिक गलियारों में यह उम्मीद जताई जा रही है कि राज्य में कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने, पुलिस कल्याणकारी योजनाओं और बस्तर समेत दक्षिणी क्षेत्रों में नक्सल विरोधी अभियानों को और अधिक गति मिलेगी।

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